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दैनिक समसामयिकी
15 May 2020(Friday)
NATIONAL
1.कई राज्यों में श्रम कानून शिथिल करने को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती
• कोरोना लॉकडाउन के चलते बंद रहे उद्योगों को गति देने के लिए विभिन्न राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और गुजरात सरकार द्वारा श्रम कानूनों को शिथिल किये जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। झारखंड के रहने वाले पंकज कुमार यादव ने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है।
• याचिका में श्रम कानूनों को शिथिल करने वाले राज्य सरकारों के आदेशों और अधिसूचनाओं को रद करने की मांग है। इतना ही नहीं, राज्य सरकारों के आदेशों पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की गई है। पंकज ने अपने वकील निर्मल अम्बष्ठा के जरिये याचिका दाखिल कर कहा है कि राज्य सरकारों को श्रम कानून को शिथिल करने और कारखाना अधिनियम में श्रमिकों के कल्याणकारी उपबंधों पर रोक लगाने से रोका जाए। याचिका में केन्द्र सरकार के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र सरकार को पक्षकार बनाया गया है।
औद्योगिक प्रतिष्ठानों को विभिन्न श्रम कानूनों से मिली छूट
• कहा गया है कि कई राज्यों ने औद्योगिक प्रतिष्ठानों को विभिन्न श्रम कानूनों से छूट दे दी है। जैसे कि कारखाना अधिनियम की धारा 5 और औद्योगिक विवाद कानून की धारा 36बी में यह छूट दी गई है। कोरोना महामारी को देखते हुए राज्य सरकारों ने कार्यकारी आदेश जारी कर नियोक्ताओं को लाभ देते हुए आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए संविधान लागू होने के पहले के बने कानूनों से छूट दे दी है।
• कहा गया है कि कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 5 सरकार को युद्ध जैसी इमरजेंसी यानी जहां देश की सुरक्षा को खतरा हो, के दौरान कानून से छूट देने का आदेश जारी करने का अधिकार देती है, लेकिन कई राज्यों ने कानून के इस उपबंध का इस्तेमाल कोरोना महामारी की इमरजेंसी में किया है।
नए अध्याोदेश से श्रमिकों की मुश्किलें बढ़ेंगी
• कहा गया है कि श्रम कानून गरीब वर्ग के कल्याण के लिए उनके हित संरक्षित करने के लिए हैं। इस समय सारी दुनिया परेशानी के दौर से गुजर रही है इस समय आर्थिक सहयोग के नाम पर राज्यों को सबसे कमजोर तबके के अधिकार छीनने का हक नहीं दिया जा सकता। विभिन्न राज्यों ने औद्योगिक प्रतिष्ठानों को कई श्रम कानूनों से छूट दे दी है।
• इन छूटों में रोजाना और साप्ताहिक काम के घंटे बढ़ाना, कामगार के कोर्ट जाने के अधिकार को खत्म करना और कार्यस्थल पर मूलभूत सुविधाओं के उपलब्ध होने के बारे में कारखाना निरीक्षक के औद्योगिक प्रतिष्ठानों के नियमित निरीक्षण को खत्म करना शामिल है।
• कहा गया है कि कोरोना महामारी के चलते केन्द्र सरकार द्वारा घोषित किये गए लॉकडाउन से लाखों मजदूरों की रोजी रोटी चली गई है, वे पहले से ही मुश्किलों में रहने को बाध्य हैं इस पर उनके कल्याण के लिए बने प्रावधानों को वापस लिये जाने से उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी।
ECONOMY
2. किसान क्रेडिट कार्ड: 2.5 करोड़ किसानों को दी जाएगी KCC, 2 लाख करोड़ रुपये का मिलेगा लोन
• वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज के दूसरे किस्त में गुरुवार को कई बड़े एलान किए। उन्होंने किसानों और गरीबों के लिए कई बड़ी घोषणाएं की।
• सीतारमण ने बताया कि सरकार ने पिछले 2 माह में ही 25 लाख किसानों को केसीसी जारी कर दिए हैं और आगे आने वाले दिनों में देश के 2.5 करोड़ किसानों को क्रेडिट कार्ड मुहैया कराए जाएंगे। इनके जरिए 2 लाख करोड़ रुपये तक की राशि जारी करने का फैसला लिया गया है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, 2.5 करोड़ किसानों को क्रेडिट कार्ड पर 2 लाख करोड़ रुपये तक का कर्ज मिलेगा।
• वित्त मंत्री ने कहा कि आदिवासी इलाकों के लोगों के लिए जॉब पैदा करने के लिए 6000 करोड़ का फंड बनाया जाएगा। नाबार्ड के जरिए किसानों के लिए 30,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त इमरजेंसी वर्किंग कैपिटल की फंडिंग की जाएगी। इस राशि को तत्काल जारी किया जाएगा। इससे करीब तीन करोड़ किसानों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है।
• यह योजना सीधे तौर पर ग्रामीण भारत एवं किसानों के फायदे के लिए है। उन्होंने कहा कि तीन माह लोन मोरेटोरियम सुविधा के साथ तीन करोड़ किसानों ने कुल 4.22 लाख करोड़ रुपये के कृषि कर्ज के लिए आवेदन किया। किसानों को ब्याज पर सहायता दी गई है।
• वित्त मंत्री के अनुसार मार्च में रूरल इंफ्रा फंड के तहत राज्यों को 4200 करोड़ रुपए दिये गए। मार्च, अप्रैल में 86600 करोड़ रुपए के 63 लाख कृषि लोन मंजूर किए। मार्च, 2020 में ग्रामीण इलाकों के बुनियादी ढांचे के लिए राज्यों को 4,209 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध करायी गई। एक मार्च, 2020 से 30 अप्रैल, 2020 के बीच कृषि के लिए 86,600 करोड़ रुपये का लोन दिया गया।
• 9 योजनाओं में से 2 योजना छोटे किसानों से संबंधित, 3 अप्रवासी मजदूरों, उन्होंने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स के लिए भी योजना है।
3. स्ट्रीट वेंडर्स के लिए 5,000 करोड़ रुपये की विशेष कर्ज सुविधा का प्रावधान, एक माह के भीतर आएगी योजना
• वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 20 लाख करोड़ के पैकेज के दूसरे किस्त को लेकर आज कई एलान किए गए। उन्होंने कृषि कर्ज पर इंटरेस्ट सब्वेंशन और प्रॉम्पट रिपेमेंट इंसेंटिव का लाभ अब 31 मई, 2020 तक देने की बात कही।
• वित्त मंत्री ने 25 लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड होल्डर्स के लिए 25,000 करोड़ रुपये के लोन को मंजूरी का एलान भी किया। वित्त मंत्री ने कहा कि गरीब कल्याण योजना देश के गरीब लोगों के लिए था। वित्त मंत्री ने बताया कि प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए 14 करोड़ 62 लाख काम पैदा किए गए। इसमें 10000 करोड़ खर्च किए।
4. किसानों को दो लाख करोड़ की सुविधा
• वित्त मंत्री ने कहा कि दो लाख करोड़ की सुविधा किसानों के लिए होगी। इसमें ढाई करोड़ किसानों को रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि आदिवासी इलाकों के लोगों के लिए जॉब पैदा करने के लिए 6000 करोड़ का फंड बनाया जाएगा।
• नाबार्ड के जरिए किसानों के लिए 30,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त इमरजेंसी वर्किंग कैपिटल की फंडिंग की जाएगी। इस राशि को तत्काल जारी किया जाएगा। इससे करीब तीन करोड़ किसानों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। यह योजना सीधे तौर पर ग्रामीण भारत एवं किसानों के फायदे के लिए है।
• वित्त मंत्री ने कहा कि हाउसिंग सेक्टर के लिए 70000 करोड़ का बढ़ावा देने वाली योजना लाएंगे। 6 लाख से 18 लाख तक आय वालों को इसका लाभ मिलेगा। 2.5 लाख मध्यम वर्ग के लोगों को फायदा होगा। मजदूरों को इसका लाभ मिलेगा।
• हाउसिंग क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम को 31 मार्च 2021 तक बढ़ा दिया गया है। वित्त मंत्री के मुताबिक, स्ट्रीट वेंडर्स के लिए 5,000 करोड़ रुपये की विशेष कर्ज सुविधा का प्रावधान सरकार ने किया है। सरकार रेहड़ी-पटरी वालों को लोन देने के लिए एक माह के भीतर विशेष योजना लाएगी।
• सीतारमण ने कहा कि इसके तहत 10,000 रुपये तक का लोन दिया जाएगा। इससे 50 लाख स्ट्रीट-वेंडर्स को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा।
एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड
• प्रवासी मजदूरों/ शहरी गरीबों के लिए किफायती रेंटल हाउसिंग कॉम्पलैक्स की व्यवस्था और सरकार PMAY के तहत प्रवासी मजदूरों और शहरी गरीबों को कम किराये पर घर उपलब्ध कराने की योजना लागू की जाएगी। इसे पीपीपी मोड के जरिए लागू किया जाएगा।
• एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड योजना से अगस्त, 2020 तक 23 राज्यों में 67 करोड़ लाभार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के जरिए यह संभव होगा। इस योजना के तहत प्रवासी मजदूर देश के किसी भी कोने में जाकर किसी भी राशन दुकान से अपने हिस्सा का राशन किफायती दाम पर खरीद कर सकेंगे।
• वित्त मंत्री ने बताया कि 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों की खाद्यान्न की आवश्यकता के लिए 3500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्हें अगले दो महीने तक 5 किलो गेहूं या चावल और एक किलो दाल उपलब्ध कराई जाएगी।
• जिनके पास खाद्य सुरक्षा कार्ड नहीं है उन्हें भी चावल या गेहूं और एक किलो दाल अगले दो महीने तक उपलब्ध कराई जाएगी। वन नेशन वन राशन कार्ड योजना लेकर आ रहे है।
• वित्त मंत्री के मुताबिक कम से कम एक न्यूनतम वेतन गरीब से गरीब मजदूर को मिले, इसके लिए कदम उठाया जाएगा। नियुक्ति पत्र सभी मजदूरों को मिलेंगे। साल में एक बार स्वास्थ्य जांच होगी। जोखिम वाली जगहों पर काम करने वालों मजदूरों के लिए योजना बनेगी। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा योजना मजदूरों के लिए लाई जाएगी।
• रात्रि में काम करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षा की व्यवस्था लाई जाएगी। सभी कर्मचारियों के लिए नियुक्ति पत्र का प्रावधान अनिवार्य किया जाना विचाराधीन है। इसके अलावा सभी कर्मचारियों की साल में एक बार हेल्थ चेकअप हो, इस पर काम चल रहा है।
• वित्त मंत्री ने कहा कि हम न्यूनतम वेतन सबके लिए लागू करना चाहते हैं, अभी यह केवल 30 फीसद कर्मचारियों के लिए लागू है। सीतारमण ने बताया कि प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए 14 करोड़ 62 लाख काम पैदा किए गए।
• ये काम 1 लाख 87 हजार ग्राम पंचायतों में हुए है। साथ ही दिहाड़ी को बढ़ाकर 202 रुपए किया गया है।
मनरेगा में पिछले साल के मुकाबले 40-50% रजिस्टर हुए
• वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार न्यूनतम मजदूरी को यूनिवर्सल बनाना चाहते है। मनरेगा में पिछले साल मई के मुकाबले 40-50% अधिक लोगों ने खुद को रजिस्टर कराया है। वित्त मंत्री के मुताबिक 1.87 लाख ग्राम पंचायतों में कल तक 2.23 करोड़ लोगों को काम दिया गया है।
• सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड के तहत राज्यों को 11000 करोड़ रुपए दिए गए। वित्त मंत्री ने बताया कि 15 मार्च के बाद से 7200 स्वयं सहायता समूह बनाए।
• निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज के बारे में विवरण देते हुए कहा कि तीन करोड़ सीमांत किसानों ने किफायती दरों पर चार लाख करोड़ रुपये का लोन प्राप्त किया है।
• वित्त मंत्री के अनुसार मार्च में रूरल इंफ्रा फंड के तहत राज्यों को 4200 करोड़ रुपए दिये गए। मार्च, अप्रैल में 86600 करोड़ रुपए के 63 लाख कृषि लोन मंजूर किए। मार्च, 2020 में ग्रामीण इलाकों के बुनियादी ढांचे के लिए राज्यों को 4,209 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध करायी गई।
• एक मार्च, 2020 से 30 अप्रैल, 2020 के बीच कृषि के लिए 86,600 करोड़ रुपये का लोन दिया गया। 9 योजनाओं में से 2 योजना छोटे किसानों से संबंधित,3 अप्रवासी मजदूरों, उन्होंने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स के लिए भी योजना है।
• सीतारमण ने बताया कि लोन मोरेटोरियम का तीन करोड़ किसानों ने फायदा उठाया। किसान लोन इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम 31 मई तक बढ़ाई गई। दो महीने में 25 लाख नए क्रेडिट कार्ड जारी किए गए।
• वित्तस मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को 20 लाख रुपये के आर्थिक पैकेज से जुड़ी अहम घोषणाएं की। इसमें उन्होंने MSME सेक्टर के लिए बिना गारंटी के 3 लाख करोड़ रुपये के लोन की सुविधा, कोलेटरल फ्री लोन से 45 लाख MSME को फायदा, MSME को 4 साल के लिए लोन, सहित कई बड़े एलान किए।
• उन्होंने कहा कि 25 करोड़ तक लोन से 100 करोड़ टर्नओवर वालों को फायदा होगा। 3 लाख करोड़ में से 20 करोड़ NBFC के लिए MSMEs के लिए 50 हजार करोड़ का फंड ऑफ़ फंड्स बनेगा।
• सीतारमण ने एमएसएमई के लिए ई-मार्केट लिंकेज पर जोर दिया, साथ ही TDS रेट में 25 फीसद की कटौती का भी एलान किया। ईपीएफ की बात करें तो 2500 करोड़ रुपए का निवेश होगा। EPF को लेकर पहले दी गई राहत जून, जुलाई और अगस्त में भी सरकार द्वारा दी जाएगी।
• ईपीएफ में सरकारी मदद से 72 लाख कर्मचारियों को फायदा होने की बात कही गई। ईपीएफ में निजी कंपनियों के अंशदान को 12 फीसद से घटाकर 10 फीसद किया गया। ईपीएफ में कटौती से इम्प्लॉयर्स को 6800 करोड़ का फायदा।
• गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में लॉकडाउन के कारण हुए अर्थव्यवस्था के नुकसान की भरपाई और देश को आत्मनिर्भर बनाने के दिशा में 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी।
• प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनके द्वारा घोषित पैकेज में पहले सरकार की ओर से दिये गए आर्थिक पैकेज और आरबीआई द्वारा दी गई राहत को मिला दिया जाए तो सरकार ने 2020 में 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है।
• पीएम द्वारा घोषित इस आर्थिक पैकेज के अंतर्गत वित्त मंत्री ने बुधवार को कई सारे राहत उपायों की घोषणा की। वित्त मंत्री ने 31 मार्च 2021 तक सभी तरह के टीडीएस व टीसीएस की मौजूदा दर में 25 फीसद की कटौती की घोषणा की है।
• इस कदम से लोगों और व्यापारों को 50,000 करोड़ रुपये का लिक्विडिटी सपोर्ट मिलेगा। इसके अलावा आयकर रिटर्न भरने की समयसीमा को भी बढ़ा दिया गया है। वित्त वर्ष 2019-20 के लिए सभी आयकर रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख को बढ़ाकर 30 नवंबर 2020 कर दिया गया है। साथ ही टैक्स ऑडिट की तारीख भी बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2020 कर दी गई है।
• वित्त मंत्री ने बुधवार को ईपीएफ को सपोर्ट करने के लिए 2,500 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी देने की भी घोषणा की है। साथ ही अब जून, जुलाई और अगस्त महीने में भी कर्मचारी और नियोक्ता का ईपीएफ योगदान भारत सरकार द्वारा ही दिया जाएगा। साथ वित्त मंत्री ने कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के ही ईपीएफ योगदान को घटाकर 10-10 फीसद करने का फैसला लिया है। यह कटौती अगले तीन महीने तक रहेगी। इससे कर्मचारियों के हाथों में अधिक वेतन पहुंच पाएगा।
INTERNATIONAL/BILATERAL
5. पाकिस्तान और ईरान में बढ़ा तनाव, बलूचिस्तान पर आपस में भिड़े
• पाकिस्तान का आरोप है कि अलगाववादी बलूच लिबरेशन ऑर्मी चरमपंथी हमलों को अंजाम देने के लिए ईरान की ज़मीन का इस्तेमाल करती है.इसी संबंध में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर बाजवा ने ईरानी सेना प्रमुख मेजर जनरल मोहम्मद बक़ेरी से बात की और कहा कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते में परस्पर सम्मान और बराबरी के साथ ये भी चाहता है कि कोई दखलंदाज़ी न हो.
• हाल के दिनों में ये दूसरा मामला है जब दोनों देशों के रिश्तों में किसी मुद्दे को लेकर खटास पैदा हुई है. पिछले दिनों पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि उसकी आपत्ति के बावजूद कोरोना के दौर में ईरान ने पाँच हज़ार लोगों को वापस पाकिस्तान भेज दिया.
• पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने पाकिस्तान में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया था. शुक्रवार को बलूचिस्तान में फ़्रंटियर कॉर्प्स के गश्ती दल पर हमला हुआ था, जिसमें छह सैनिक मारे गए थे.
• इस हमले की ज़िम्मेदारी बलोच लिबरेशन आर्मी ने ली थी. पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दोनों सेना प्रमुखों ने सीमा पर सुरक्षा उपाय कड़े करने पर सहमति जताई.पाकिस्तान के उलट ईरान का आरोप है कि पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल ईरानी चरमपंथी करते हैं. दोनों देशों के बीच ये आरोप-प्रत्यारोप लंबे समय से चला आ रहा है.
• पाकिस्तान तो ईरान के साथ लगी 909 किलोमीटर की सीमा पर बाड़ लगाने का काम भी शुरू कर चुका है. पाकिस्तान की सरकार ने इसके लिए तीन अरब रुपए की धनराशि भी आवटित कर दी है.
आरोप प्रत्यारोप
• पिछले साल फ़रवरी में जब ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स पर हमला हुआ था, तो ईरान ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी थी. हमले में रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के 27 जवान मारे गए थे.ईरान का आरोप था कि पाकिस्तान में पनाह लिए चरमपंथियों ने ये हमला किया था. लेकिन पिछले साल अप्रैल में जब बलूच में पाकिस्तानी सैनिकों पर हमला हुआ, तो पाकिस्तान ने इसके लिए ईरान में मौजूद बलूच अलगाववादियों को ज़िम्मेदार बताया.
• इस हमले में 14 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे. उसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने ईरान का दौरा किया. इमरान ख़ान की यात्रा के पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ईरानी दूतावास को लिखे एक कड़े पत्र में कहा था कि हमलावर ईरान से आए थे.अपनी ईरान यात्रा में इमरान ख़ान ने ये मुद्दा भी उठाया. दोनों देशों ने सीमा पार से चरमपंथी गतिविधियों को रोकने पर सहमति भी जताई.
• दरअसल पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत ईरान की सीमा से लगा हुआ है. बलूच पाकिस्तान में भी हैं और ईरान में भी. ईरान का सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत पाकिस्तान की सीमा से लगा है, जहाँ बलूच रहते हैं.एक समय ऐसा भी था जब पाकिस्तान और ईरान दोनों बलूच नेशनलिस्ट के बढ़ते प्रभाव को ख़तरा मानते थे. 70 के दशक में इन नेताओं और आंदोलन पर कार्रवाई भी हुई.लेकिन पाकिस्तान के साथ कई मुद्दों पर विवाद के बीच ईरान ने बलूच नेशनलिस्ट को लेकर नरम रवैया अपनाना शुरू कर दिया.
• ईरान में मौजूद बलूच संगठन ईरान के ख़िलाफ़ सुन्नी बलूच संगठनों से भी दो-दो हाथ करते रहते हैं और कई मौक़े पर उन्होंने ईरान की मदद भी की है.
रिश्ते में उतार-चढ़ाव
• पाकिस्तान और ईरान के रिश्ते में हमेशा से उतार-चढ़ावा आता रहा है. 1947 में जब पाकिस्तान का गठन हुआ, तो ईरान वैसे कुछ देशों में शामिल था, जिन्होंने पाकिस्तान को मान्यता दी थी.
• 1948 में तो पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाक़त अली ख़ान ने ईरान का दौरा भी किया था. बाद में ईरान के शाह ने 1950 में पाकिस्तान का दौरा किया. दोनों देशों के रिश्ते अच्छी दिशा में जाते दिख रहे थे.लेकिन सुन्नी बहुल पाकिस्तान और शिया बहुल ईरान के रिश्ते हमेशा अच्छे नहीं रहे. लेकिन पाकिस्तान में शिया-सुन्नी तनाव का असर ईरान के साथ उसके रिश्ते पर पड़ा.
• 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान ने पाकिस्तान को लेकर आक्रामक रुख़ अपनाना शुरू कर दिया. साथ ही उसने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को प्रश्रय देने की पाकिस्तान की नीति का विरोध भी किया.
• अमरीका में 9/11 के हमले के बाद पाकिस्तान की नीति ईरान को नहीं भाई. साथ ही पाकिस्तान की सऊदी अरब समर्थक नीति ने भी रिश्तों में खटास पैदा की.
• जनरल ज़िया उल हक़ के शासनकाल में पाकिस्तान की सऊदी अरब के साथ नज़दीकी और बढ़ी और ईरान को ये बातें फूटी आँखों नहीं सुहाती थी.
लेकिन इन सबके बीच दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध क़ायम रहे. और तो और ईरान ने चीन की अगुआई में बन रहे आर्थिक कॉरिडोर को लेकर भी अपनी रुचि दिखाई. पाकिस्तान के लिए भी तेल और गैस से संपन्न ईरान व्यापार के लिए बेहतर विकल्प रहा.
मध्यस्थता
• इस साल जनवरी में जब अमरीकी सेना की कार्रवाई में ईरानी सेना के कमांडर मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी.
• इसके बाद अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख बाजवा को फ़ोन किया. पाकिस्तान ने ईरान और अमरीका के बीच तनाव कम करने की कोशिश की.पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने तो एक सभा में यहाँ तक कह दिया कि पाकिस्तान अपनी ज़मीन का इस्तेमाल किसी भी देश के ख़िलाफ़ हमले के लिए नहीं होने देगा. इमरान ख़ान ने उस समय सऊदी अरब और ईरान में सुलह कराने की बात भी की थी.
• हालांकि ईरान में कुछ लोगों को ये बात नागवार गुज़री की कि पाकिस्तान ने कड़े शब्दों में सुलेमानी की हत्या की निंदा नहीं की.
आंतरिक स्थिति
• हालांकि सच ये भी है कि अगर सुलेमानी की मौत पर ईरान और अमरीका में युद्ध छिड़ता, तो ये पाकिस्तान के लिए अच्छी स्थिति नहीं होती. शायद इसलिए पाकिस्तान ने सुलह के लिए पहल की और कहीं न कहीं अमरीका ने भी पाकिस्तान का साथ लिया.लेकिन अधिकतर मौक़ों पर पाकिस्तान ईरान और अमरीका के रिश्तों में तटस्थ ही रहना चाहता है, ये भी सच है. शायद इसकी वजह पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति भी है.
• जम्मू-कश्मीर में जब भारत ने अनुच्छेद 370 को हटाने की घोषणा की तो ईरान ने कड़ा रुख़ अपनाया था. इस साल जब भारत की राजधानी दिल्ली में दंगे हुए थे, तो ईरान के विदेश मंत्री ने ट्वीट करके कहा था कि ईरान में भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ प्रायोजित हिंसा का विरोध करता है.कश्मीर और दिल्ली दंगों पर ईरान का रुख़ पाकिस्तान के लिए ख़ुश करने वाला था.
• इन सबके बीच ईरान के साथ पाकिस्तान के रिश्ते खट्टे-मीठे ही रहे हैं. जहाँ धर्म, संस्कृति और साहित्य को लेकर दोनों देश बंधे हुए दिखते हैं, वहीं सीमावर्ती इलाक़ों में होती चरमंपथी घटनाएँ रिश्तों में आड़े आती रही हैं.
HEALTH
6. शायद कभी न खत्म हो कोरोना, रोज मर सकते हैं 6000 बच्चे
• संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कोरोना संकट से बढ़ रही मनोवैज्ञानिक परेशानियों को लेकर आगाह किया है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं कोविड-19 से निपटने में सरकारी की नीति का आवश्यक हिस्सा होनी चाहिए।
• उन्होंने सरकारों, नागरिक संस्थाओं और स्वास्थ्य अधिकारियों से इस समस्या से निपटने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि लोगों को परिजनों को खोने के दुख, नौकरी जाने का सदमा, आइसोलेशन, आवाजाही पर पाबंदियों और भविष्य को लेकर डर जैसी फिक्र है। महामारी अब उन लोगों को अधिक प्रभावित कर रही है जो तनावग्रस्त हैं।
• रोमः इटली में एक नए अध्ययन से पता चला है कि बच्चों के शरीर में जलन संबंधी लक्षण का ताल्लुक कोरोना वायरस से है। शोधकर्ताओं ने बताया कि बच्चों को शरीर पर जलन महसूस हो रही है। अकेले बरगामो शहर में 10 ऐसे मामले सामने आए हैं, जो कोरोना वायरस से जुड़े हुए हैं।
• डॉक्टरों के पास ऐसे बच्चे आए हैं जिनके पूरे शरीर पर लाल चकते बन गए हैं और हाथ-पांव में सूजन नजर आ रहा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि पिछले पांच साल में इस तरह के लक्षण वाले सिर्फ 19 बच्चे हॉस्पिटल में भर्ती हुए, लेकिन दो महीनों में इस तरह के मामलों की संख्या 30 गुना तक बढ़ गई है।
• अस्पताल में भर्ती हुए 80 फीसदी बच्चों में कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए थे, जबकि 60 प्रतिशत गंभीर रोगों जैसे कि हार्ट डिजिज से पीड़ित थे। शरीर पर जलन महसूस करने वाले लक्षण सबसे पहले ब्रिटेन, इटली और फिर स्पेन के बच्चों में दिखाई दिए हैं।
• यह कावासाकी बीमारी से मिलता-जुलता है। कावासाकी बीमारी ज्यादातर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में पाई जाती है।
Source of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)
15 May 2020(Friday)
NATIONAL
1.कई राज्यों में श्रम कानून शिथिल करने को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती
• कोरोना लॉकडाउन के चलते बंद रहे उद्योगों को गति देने के लिए विभिन्न राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और गुजरात सरकार द्वारा श्रम कानूनों को शिथिल किये जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। झारखंड के रहने वाले पंकज कुमार यादव ने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है।
• याचिका में श्रम कानूनों को शिथिल करने वाले राज्य सरकारों के आदेशों और अधिसूचनाओं को रद करने की मांग है। इतना ही नहीं, राज्य सरकारों के आदेशों पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की गई है। पंकज ने अपने वकील निर्मल अम्बष्ठा के जरिये याचिका दाखिल कर कहा है कि राज्य सरकारों को श्रम कानून को शिथिल करने और कारखाना अधिनियम में श्रमिकों के कल्याणकारी उपबंधों पर रोक लगाने से रोका जाए। याचिका में केन्द्र सरकार के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र सरकार को पक्षकार बनाया गया है।
औद्योगिक प्रतिष्ठानों को विभिन्न श्रम कानूनों से मिली छूट
• कहा गया है कि कई राज्यों ने औद्योगिक प्रतिष्ठानों को विभिन्न श्रम कानूनों से छूट दे दी है। जैसे कि कारखाना अधिनियम की धारा 5 और औद्योगिक विवाद कानून की धारा 36बी में यह छूट दी गई है। कोरोना महामारी को देखते हुए राज्य सरकारों ने कार्यकारी आदेश जारी कर नियोक्ताओं को लाभ देते हुए आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए संविधान लागू होने के पहले के बने कानूनों से छूट दे दी है।
• कहा गया है कि कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 5 सरकार को युद्ध जैसी इमरजेंसी यानी जहां देश की सुरक्षा को खतरा हो, के दौरान कानून से छूट देने का आदेश जारी करने का अधिकार देती है, लेकिन कई राज्यों ने कानून के इस उपबंध का इस्तेमाल कोरोना महामारी की इमरजेंसी में किया है।
नए अध्याोदेश से श्रमिकों की मुश्किलें बढ़ेंगी
• कहा गया है कि श्रम कानून गरीब वर्ग के कल्याण के लिए उनके हित संरक्षित करने के लिए हैं। इस समय सारी दुनिया परेशानी के दौर से गुजर रही है इस समय आर्थिक सहयोग के नाम पर राज्यों को सबसे कमजोर तबके के अधिकार छीनने का हक नहीं दिया जा सकता। विभिन्न राज्यों ने औद्योगिक प्रतिष्ठानों को कई श्रम कानूनों से छूट दे दी है।
• इन छूटों में रोजाना और साप्ताहिक काम के घंटे बढ़ाना, कामगार के कोर्ट जाने के अधिकार को खत्म करना और कार्यस्थल पर मूलभूत सुविधाओं के उपलब्ध होने के बारे में कारखाना निरीक्षक के औद्योगिक प्रतिष्ठानों के नियमित निरीक्षण को खत्म करना शामिल है।
• कहा गया है कि कोरोना महामारी के चलते केन्द्र सरकार द्वारा घोषित किये गए लॉकडाउन से लाखों मजदूरों की रोजी रोटी चली गई है, वे पहले से ही मुश्किलों में रहने को बाध्य हैं इस पर उनके कल्याण के लिए बने प्रावधानों को वापस लिये जाने से उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी।
ECONOMY
2. किसान क्रेडिट कार्ड: 2.5 करोड़ किसानों को दी जाएगी KCC, 2 लाख करोड़ रुपये का मिलेगा लोन
• वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज के दूसरे किस्त में गुरुवार को कई बड़े एलान किए। उन्होंने किसानों और गरीबों के लिए कई बड़ी घोषणाएं की।
• सीतारमण ने बताया कि सरकार ने पिछले 2 माह में ही 25 लाख किसानों को केसीसी जारी कर दिए हैं और आगे आने वाले दिनों में देश के 2.5 करोड़ किसानों को क्रेडिट कार्ड मुहैया कराए जाएंगे। इनके जरिए 2 लाख करोड़ रुपये तक की राशि जारी करने का फैसला लिया गया है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, 2.5 करोड़ किसानों को क्रेडिट कार्ड पर 2 लाख करोड़ रुपये तक का कर्ज मिलेगा।
• वित्त मंत्री ने कहा कि आदिवासी इलाकों के लोगों के लिए जॉब पैदा करने के लिए 6000 करोड़ का फंड बनाया जाएगा। नाबार्ड के जरिए किसानों के लिए 30,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त इमरजेंसी वर्किंग कैपिटल की फंडिंग की जाएगी। इस राशि को तत्काल जारी किया जाएगा। इससे करीब तीन करोड़ किसानों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है।
• यह योजना सीधे तौर पर ग्रामीण भारत एवं किसानों के फायदे के लिए है। उन्होंने कहा कि तीन माह लोन मोरेटोरियम सुविधा के साथ तीन करोड़ किसानों ने कुल 4.22 लाख करोड़ रुपये के कृषि कर्ज के लिए आवेदन किया। किसानों को ब्याज पर सहायता दी गई है।
• वित्त मंत्री के अनुसार मार्च में रूरल इंफ्रा फंड के तहत राज्यों को 4200 करोड़ रुपए दिये गए। मार्च, अप्रैल में 86600 करोड़ रुपए के 63 लाख कृषि लोन मंजूर किए। मार्च, 2020 में ग्रामीण इलाकों के बुनियादी ढांचे के लिए राज्यों को 4,209 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध करायी गई। एक मार्च, 2020 से 30 अप्रैल, 2020 के बीच कृषि के लिए 86,600 करोड़ रुपये का लोन दिया गया।
• 9 योजनाओं में से 2 योजना छोटे किसानों से संबंधित, 3 अप्रवासी मजदूरों, उन्होंने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स के लिए भी योजना है।
3. स्ट्रीट वेंडर्स के लिए 5,000 करोड़ रुपये की विशेष कर्ज सुविधा का प्रावधान, एक माह के भीतर आएगी योजना
• वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 20 लाख करोड़ के पैकेज के दूसरे किस्त को लेकर आज कई एलान किए गए। उन्होंने कृषि कर्ज पर इंटरेस्ट सब्वेंशन और प्रॉम्पट रिपेमेंट इंसेंटिव का लाभ अब 31 मई, 2020 तक देने की बात कही।
• वित्त मंत्री ने 25 लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड होल्डर्स के लिए 25,000 करोड़ रुपये के लोन को मंजूरी का एलान भी किया। वित्त मंत्री ने कहा कि गरीब कल्याण योजना देश के गरीब लोगों के लिए था। वित्त मंत्री ने बताया कि प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए 14 करोड़ 62 लाख काम पैदा किए गए। इसमें 10000 करोड़ खर्च किए।
4. किसानों को दो लाख करोड़ की सुविधा
• वित्त मंत्री ने कहा कि दो लाख करोड़ की सुविधा किसानों के लिए होगी। इसमें ढाई करोड़ किसानों को रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि आदिवासी इलाकों के लोगों के लिए जॉब पैदा करने के लिए 6000 करोड़ का फंड बनाया जाएगा।
• नाबार्ड के जरिए किसानों के लिए 30,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त इमरजेंसी वर्किंग कैपिटल की फंडिंग की जाएगी। इस राशि को तत्काल जारी किया जाएगा। इससे करीब तीन करोड़ किसानों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। यह योजना सीधे तौर पर ग्रामीण भारत एवं किसानों के फायदे के लिए है।
• वित्त मंत्री ने कहा कि हाउसिंग सेक्टर के लिए 70000 करोड़ का बढ़ावा देने वाली योजना लाएंगे। 6 लाख से 18 लाख तक आय वालों को इसका लाभ मिलेगा। 2.5 लाख मध्यम वर्ग के लोगों को फायदा होगा। मजदूरों को इसका लाभ मिलेगा।
• हाउसिंग क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम को 31 मार्च 2021 तक बढ़ा दिया गया है। वित्त मंत्री के मुताबिक, स्ट्रीट वेंडर्स के लिए 5,000 करोड़ रुपये की विशेष कर्ज सुविधा का प्रावधान सरकार ने किया है। सरकार रेहड़ी-पटरी वालों को लोन देने के लिए एक माह के भीतर विशेष योजना लाएगी।
• सीतारमण ने कहा कि इसके तहत 10,000 रुपये तक का लोन दिया जाएगा। इससे 50 लाख स्ट्रीट-वेंडर्स को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा।
एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड
• प्रवासी मजदूरों/ शहरी गरीबों के लिए किफायती रेंटल हाउसिंग कॉम्पलैक्स की व्यवस्था और सरकार PMAY के तहत प्रवासी मजदूरों और शहरी गरीबों को कम किराये पर घर उपलब्ध कराने की योजना लागू की जाएगी। इसे पीपीपी मोड के जरिए लागू किया जाएगा।
• एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड योजना से अगस्त, 2020 तक 23 राज्यों में 67 करोड़ लाभार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के जरिए यह संभव होगा। इस योजना के तहत प्रवासी मजदूर देश के किसी भी कोने में जाकर किसी भी राशन दुकान से अपने हिस्सा का राशन किफायती दाम पर खरीद कर सकेंगे।
• वित्त मंत्री ने बताया कि 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों की खाद्यान्न की आवश्यकता के लिए 3500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्हें अगले दो महीने तक 5 किलो गेहूं या चावल और एक किलो दाल उपलब्ध कराई जाएगी।
• जिनके पास खाद्य सुरक्षा कार्ड नहीं है उन्हें भी चावल या गेहूं और एक किलो दाल अगले दो महीने तक उपलब्ध कराई जाएगी। वन नेशन वन राशन कार्ड योजना लेकर आ रहे है।
• वित्त मंत्री के मुताबिक कम से कम एक न्यूनतम वेतन गरीब से गरीब मजदूर को मिले, इसके लिए कदम उठाया जाएगा। नियुक्ति पत्र सभी मजदूरों को मिलेंगे। साल में एक बार स्वास्थ्य जांच होगी। जोखिम वाली जगहों पर काम करने वालों मजदूरों के लिए योजना बनेगी। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा योजना मजदूरों के लिए लाई जाएगी।
• रात्रि में काम करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षा की व्यवस्था लाई जाएगी। सभी कर्मचारियों के लिए नियुक्ति पत्र का प्रावधान अनिवार्य किया जाना विचाराधीन है। इसके अलावा सभी कर्मचारियों की साल में एक बार हेल्थ चेकअप हो, इस पर काम चल रहा है।
• वित्त मंत्री ने कहा कि हम न्यूनतम वेतन सबके लिए लागू करना चाहते हैं, अभी यह केवल 30 फीसद कर्मचारियों के लिए लागू है। सीतारमण ने बताया कि प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए 14 करोड़ 62 लाख काम पैदा किए गए।
• ये काम 1 लाख 87 हजार ग्राम पंचायतों में हुए है। साथ ही दिहाड़ी को बढ़ाकर 202 रुपए किया गया है।
मनरेगा में पिछले साल के मुकाबले 40-50% रजिस्टर हुए
• वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार न्यूनतम मजदूरी को यूनिवर्सल बनाना चाहते है। मनरेगा में पिछले साल मई के मुकाबले 40-50% अधिक लोगों ने खुद को रजिस्टर कराया है। वित्त मंत्री के मुताबिक 1.87 लाख ग्राम पंचायतों में कल तक 2.23 करोड़ लोगों को काम दिया गया है।
• सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड के तहत राज्यों को 11000 करोड़ रुपए दिए गए। वित्त मंत्री ने बताया कि 15 मार्च के बाद से 7200 स्वयं सहायता समूह बनाए।
• निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज के बारे में विवरण देते हुए कहा कि तीन करोड़ सीमांत किसानों ने किफायती दरों पर चार लाख करोड़ रुपये का लोन प्राप्त किया है।
• वित्त मंत्री के अनुसार मार्च में रूरल इंफ्रा फंड के तहत राज्यों को 4200 करोड़ रुपए दिये गए। मार्च, अप्रैल में 86600 करोड़ रुपए के 63 लाख कृषि लोन मंजूर किए। मार्च, 2020 में ग्रामीण इलाकों के बुनियादी ढांचे के लिए राज्यों को 4,209 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध करायी गई।
• एक मार्च, 2020 से 30 अप्रैल, 2020 के बीच कृषि के लिए 86,600 करोड़ रुपये का लोन दिया गया। 9 योजनाओं में से 2 योजना छोटे किसानों से संबंधित,3 अप्रवासी मजदूरों, उन्होंने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स के लिए भी योजना है।
• सीतारमण ने बताया कि लोन मोरेटोरियम का तीन करोड़ किसानों ने फायदा उठाया। किसान लोन इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम 31 मई तक बढ़ाई गई। दो महीने में 25 लाख नए क्रेडिट कार्ड जारी किए गए।
• वित्तस मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को 20 लाख रुपये के आर्थिक पैकेज से जुड़ी अहम घोषणाएं की। इसमें उन्होंने MSME सेक्टर के लिए बिना गारंटी के 3 लाख करोड़ रुपये के लोन की सुविधा, कोलेटरल फ्री लोन से 45 लाख MSME को फायदा, MSME को 4 साल के लिए लोन, सहित कई बड़े एलान किए।
• उन्होंने कहा कि 25 करोड़ तक लोन से 100 करोड़ टर्नओवर वालों को फायदा होगा। 3 लाख करोड़ में से 20 करोड़ NBFC के लिए MSMEs के लिए 50 हजार करोड़ का फंड ऑफ़ फंड्स बनेगा।
• सीतारमण ने एमएसएमई के लिए ई-मार्केट लिंकेज पर जोर दिया, साथ ही TDS रेट में 25 फीसद की कटौती का भी एलान किया। ईपीएफ की बात करें तो 2500 करोड़ रुपए का निवेश होगा। EPF को लेकर पहले दी गई राहत जून, जुलाई और अगस्त में भी सरकार द्वारा दी जाएगी।
• ईपीएफ में सरकारी मदद से 72 लाख कर्मचारियों को फायदा होने की बात कही गई। ईपीएफ में निजी कंपनियों के अंशदान को 12 फीसद से घटाकर 10 फीसद किया गया। ईपीएफ में कटौती से इम्प्लॉयर्स को 6800 करोड़ का फायदा।
• गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में लॉकडाउन के कारण हुए अर्थव्यवस्था के नुकसान की भरपाई और देश को आत्मनिर्भर बनाने के दिशा में 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी।
• प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनके द्वारा घोषित पैकेज में पहले सरकार की ओर से दिये गए आर्थिक पैकेज और आरबीआई द्वारा दी गई राहत को मिला दिया जाए तो सरकार ने 2020 में 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है।
• पीएम द्वारा घोषित इस आर्थिक पैकेज के अंतर्गत वित्त मंत्री ने बुधवार को कई सारे राहत उपायों की घोषणा की। वित्त मंत्री ने 31 मार्च 2021 तक सभी तरह के टीडीएस व टीसीएस की मौजूदा दर में 25 फीसद की कटौती की घोषणा की है।
• इस कदम से लोगों और व्यापारों को 50,000 करोड़ रुपये का लिक्विडिटी सपोर्ट मिलेगा। इसके अलावा आयकर रिटर्न भरने की समयसीमा को भी बढ़ा दिया गया है। वित्त वर्ष 2019-20 के लिए सभी आयकर रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख को बढ़ाकर 30 नवंबर 2020 कर दिया गया है। साथ ही टैक्स ऑडिट की तारीख भी बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2020 कर दी गई है।
• वित्त मंत्री ने बुधवार को ईपीएफ को सपोर्ट करने के लिए 2,500 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी देने की भी घोषणा की है। साथ ही अब जून, जुलाई और अगस्त महीने में भी कर्मचारी और नियोक्ता का ईपीएफ योगदान भारत सरकार द्वारा ही दिया जाएगा। साथ वित्त मंत्री ने कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के ही ईपीएफ योगदान को घटाकर 10-10 फीसद करने का फैसला लिया है। यह कटौती अगले तीन महीने तक रहेगी। इससे कर्मचारियों के हाथों में अधिक वेतन पहुंच पाएगा।
INTERNATIONAL/BILATERAL
5. पाकिस्तान और ईरान में बढ़ा तनाव, बलूचिस्तान पर आपस में भिड़े
• पाकिस्तान का आरोप है कि अलगाववादी बलूच लिबरेशन ऑर्मी चरमपंथी हमलों को अंजाम देने के लिए ईरान की ज़मीन का इस्तेमाल करती है.इसी संबंध में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर बाजवा ने ईरानी सेना प्रमुख मेजर जनरल मोहम्मद बक़ेरी से बात की और कहा कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते में परस्पर सम्मान और बराबरी के साथ ये भी चाहता है कि कोई दखलंदाज़ी न हो.
• हाल के दिनों में ये दूसरा मामला है जब दोनों देशों के रिश्तों में किसी मुद्दे को लेकर खटास पैदा हुई है. पिछले दिनों पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि उसकी आपत्ति के बावजूद कोरोना के दौर में ईरान ने पाँच हज़ार लोगों को वापस पाकिस्तान भेज दिया.
• पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने पाकिस्तान में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया था. शुक्रवार को बलूचिस्तान में फ़्रंटियर कॉर्प्स के गश्ती दल पर हमला हुआ था, जिसमें छह सैनिक मारे गए थे.
• इस हमले की ज़िम्मेदारी बलोच लिबरेशन आर्मी ने ली थी. पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दोनों सेना प्रमुखों ने सीमा पर सुरक्षा उपाय कड़े करने पर सहमति जताई.पाकिस्तान के उलट ईरान का आरोप है कि पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल ईरानी चरमपंथी करते हैं. दोनों देशों के बीच ये आरोप-प्रत्यारोप लंबे समय से चला आ रहा है.
• पाकिस्तान तो ईरान के साथ लगी 909 किलोमीटर की सीमा पर बाड़ लगाने का काम भी शुरू कर चुका है. पाकिस्तान की सरकार ने इसके लिए तीन अरब रुपए की धनराशि भी आवटित कर दी है.
आरोप प्रत्यारोप
• पिछले साल फ़रवरी में जब ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स पर हमला हुआ था, तो ईरान ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी थी. हमले में रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के 27 जवान मारे गए थे.ईरान का आरोप था कि पाकिस्तान में पनाह लिए चरमपंथियों ने ये हमला किया था. लेकिन पिछले साल अप्रैल में जब बलूच में पाकिस्तानी सैनिकों पर हमला हुआ, तो पाकिस्तान ने इसके लिए ईरान में मौजूद बलूच अलगाववादियों को ज़िम्मेदार बताया.
• इस हमले में 14 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे. उसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने ईरान का दौरा किया. इमरान ख़ान की यात्रा के पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ईरानी दूतावास को लिखे एक कड़े पत्र में कहा था कि हमलावर ईरान से आए थे.अपनी ईरान यात्रा में इमरान ख़ान ने ये मुद्दा भी उठाया. दोनों देशों ने सीमा पार से चरमपंथी गतिविधियों को रोकने पर सहमति भी जताई.
• दरअसल पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत ईरान की सीमा से लगा हुआ है. बलूच पाकिस्तान में भी हैं और ईरान में भी. ईरान का सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत पाकिस्तान की सीमा से लगा है, जहाँ बलूच रहते हैं.एक समय ऐसा भी था जब पाकिस्तान और ईरान दोनों बलूच नेशनलिस्ट के बढ़ते प्रभाव को ख़तरा मानते थे. 70 के दशक में इन नेताओं और आंदोलन पर कार्रवाई भी हुई.लेकिन पाकिस्तान के साथ कई मुद्दों पर विवाद के बीच ईरान ने बलूच नेशनलिस्ट को लेकर नरम रवैया अपनाना शुरू कर दिया.
• ईरान में मौजूद बलूच संगठन ईरान के ख़िलाफ़ सुन्नी बलूच संगठनों से भी दो-दो हाथ करते रहते हैं और कई मौक़े पर उन्होंने ईरान की मदद भी की है.
रिश्ते में उतार-चढ़ाव
• पाकिस्तान और ईरान के रिश्ते में हमेशा से उतार-चढ़ावा आता रहा है. 1947 में जब पाकिस्तान का गठन हुआ, तो ईरान वैसे कुछ देशों में शामिल था, जिन्होंने पाकिस्तान को मान्यता दी थी.
• 1948 में तो पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाक़त अली ख़ान ने ईरान का दौरा भी किया था. बाद में ईरान के शाह ने 1950 में पाकिस्तान का दौरा किया. दोनों देशों के रिश्ते अच्छी दिशा में जाते दिख रहे थे.लेकिन सुन्नी बहुल पाकिस्तान और शिया बहुल ईरान के रिश्ते हमेशा अच्छे नहीं रहे. लेकिन पाकिस्तान में शिया-सुन्नी तनाव का असर ईरान के साथ उसके रिश्ते पर पड़ा.
• 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान ने पाकिस्तान को लेकर आक्रामक रुख़ अपनाना शुरू कर दिया. साथ ही उसने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को प्रश्रय देने की पाकिस्तान की नीति का विरोध भी किया.
• अमरीका में 9/11 के हमले के बाद पाकिस्तान की नीति ईरान को नहीं भाई. साथ ही पाकिस्तान की सऊदी अरब समर्थक नीति ने भी रिश्तों में खटास पैदा की.
• जनरल ज़िया उल हक़ के शासनकाल में पाकिस्तान की सऊदी अरब के साथ नज़दीकी और बढ़ी और ईरान को ये बातें फूटी आँखों नहीं सुहाती थी.
लेकिन इन सबके बीच दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध क़ायम रहे. और तो और ईरान ने चीन की अगुआई में बन रहे आर्थिक कॉरिडोर को लेकर भी अपनी रुचि दिखाई. पाकिस्तान के लिए भी तेल और गैस से संपन्न ईरान व्यापार के लिए बेहतर विकल्प रहा.
मध्यस्थता
• इस साल जनवरी में जब अमरीकी सेना की कार्रवाई में ईरानी सेना के कमांडर मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी.
• इसके बाद अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख बाजवा को फ़ोन किया. पाकिस्तान ने ईरान और अमरीका के बीच तनाव कम करने की कोशिश की.पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने तो एक सभा में यहाँ तक कह दिया कि पाकिस्तान अपनी ज़मीन का इस्तेमाल किसी भी देश के ख़िलाफ़ हमले के लिए नहीं होने देगा. इमरान ख़ान ने उस समय सऊदी अरब और ईरान में सुलह कराने की बात भी की थी.
• हालांकि ईरान में कुछ लोगों को ये बात नागवार गुज़री की कि पाकिस्तान ने कड़े शब्दों में सुलेमानी की हत्या की निंदा नहीं की.
आंतरिक स्थिति
• हालांकि सच ये भी है कि अगर सुलेमानी की मौत पर ईरान और अमरीका में युद्ध छिड़ता, तो ये पाकिस्तान के लिए अच्छी स्थिति नहीं होती. शायद इसलिए पाकिस्तान ने सुलह के लिए पहल की और कहीं न कहीं अमरीका ने भी पाकिस्तान का साथ लिया.लेकिन अधिकतर मौक़ों पर पाकिस्तान ईरान और अमरीका के रिश्तों में तटस्थ ही रहना चाहता है, ये भी सच है. शायद इसकी वजह पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति भी है.
• जम्मू-कश्मीर में जब भारत ने अनुच्छेद 370 को हटाने की घोषणा की तो ईरान ने कड़ा रुख़ अपनाया था. इस साल जब भारत की राजधानी दिल्ली में दंगे हुए थे, तो ईरान के विदेश मंत्री ने ट्वीट करके कहा था कि ईरान में भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ प्रायोजित हिंसा का विरोध करता है.कश्मीर और दिल्ली दंगों पर ईरान का रुख़ पाकिस्तान के लिए ख़ुश करने वाला था.
• इन सबके बीच ईरान के साथ पाकिस्तान के रिश्ते खट्टे-मीठे ही रहे हैं. जहाँ धर्म, संस्कृति और साहित्य को लेकर दोनों देश बंधे हुए दिखते हैं, वहीं सीमावर्ती इलाक़ों में होती चरमंपथी घटनाएँ रिश्तों में आड़े आती रही हैं.
HEALTH
6. शायद कभी न खत्म हो कोरोना, रोज मर सकते हैं 6000 बच्चे
• संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कोरोना संकट से बढ़ रही मनोवैज्ञानिक परेशानियों को लेकर आगाह किया है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं कोविड-19 से निपटने में सरकारी की नीति का आवश्यक हिस्सा होनी चाहिए।
• उन्होंने सरकारों, नागरिक संस्थाओं और स्वास्थ्य अधिकारियों से इस समस्या से निपटने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि लोगों को परिजनों को खोने के दुख, नौकरी जाने का सदमा, आइसोलेशन, आवाजाही पर पाबंदियों और भविष्य को लेकर डर जैसी फिक्र है। महामारी अब उन लोगों को अधिक प्रभावित कर रही है जो तनावग्रस्त हैं।
• रोमः इटली में एक नए अध्ययन से पता चला है कि बच्चों के शरीर में जलन संबंधी लक्षण का ताल्लुक कोरोना वायरस से है। शोधकर्ताओं ने बताया कि बच्चों को शरीर पर जलन महसूस हो रही है। अकेले बरगामो शहर में 10 ऐसे मामले सामने आए हैं, जो कोरोना वायरस से जुड़े हुए हैं।
• डॉक्टरों के पास ऐसे बच्चे आए हैं जिनके पूरे शरीर पर लाल चकते बन गए हैं और हाथ-पांव में सूजन नजर आ रहा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि पिछले पांच साल में इस तरह के लक्षण वाले सिर्फ 19 बच्चे हॉस्पिटल में भर्ती हुए, लेकिन दो महीनों में इस तरह के मामलों की संख्या 30 गुना तक बढ़ गई है।
• अस्पताल में भर्ती हुए 80 फीसदी बच्चों में कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए थे, जबकि 60 प्रतिशत गंभीर रोगों जैसे कि हार्ट डिजिज से पीड़ित थे। शरीर पर जलन महसूस करने वाले लक्षण सबसे पहले ब्रिटेन, इटली और फिर स्पेन के बच्चों में दिखाई दिए हैं।
• यह कावासाकी बीमारी से मिलता-जुलता है। कावासाकी बीमारी ज्यादातर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में पाई जाती है।
Source of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)
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