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अपनी लक्ष्मण रेखाओं का अनादर (विभूति नारायण राय) (पूर्व आईपीएस अधिकारी) (साभार हिंदुस्तान ) भारतीय संविधान एक ऐसे संघ की कल्पना करता है, जिसमें राज्यों और केंद्र के अलग-अलग क्षेत्राधिकार स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। केंद्र और राज्य सूचियों के अतिरिक्त संविधान में एक समवर्ती सूची भी है, जिसमें शामिल विषयों पर दोनों कानून बना सकते हैं। कानून-व्यवस्था और पुलिस ऐसे क्षेत्र हैं, जो राज्यों के अधीन हैं और स्वाभाविक अपेक्षा यह होनी चाहिए कि इनमें राज्यों की राय अंतिम होगी, पर ऐसा अक्सर होता नहीं है। देश की आजादी के बाद केंद्र में अलग-अलग दलों की सरकारें बनी हैं और लगभग सभी की इच्छा राज्यों की पुलिस पर नियंत्रण करने की रही है। कभी दबी-छिपी दमित-सी, और कभी बेशर्म उद्दाम भी। संविधान सभा की बहसों और बाद में अपने लेखन के जरिए डॉ आंबेडकर ने कई बार चिंता व्यक्त की थी कि भारत में भाषिक, धार्मिक या क्षेत्रीय विविधताओं के चलते विभाजनकारी शक्तियों के प्रभावी होने की आशंकाएं हमेशा रहेंगी, इसलिए एक शक्तिशाली केंद्र का होना आवश्यक रहेगा। उन्होंने संघ (यूनियन) और महासंघ (फेडरेशन) में संघ को...